चुनाव आयोग का ग्रहण
श्योपुर (उमेश सक्सेना ) मध्यप्रदेश में कम वर्षा के चलते सूखे की चपेट में आने के बावजूद प्रदेश के 41 जिलों की 152 तहसीलें सूखाग्र्रस्त घोषित नहीं की जा सकी हैं। इस राह में चुनाव आयोग का ग्रहण लग गया है, जिसने 28 मई तक इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया है।उल्लेखनीय है कि इस बार प्रदेश में पानी की स्थिति अत्यंत विकट है। कई अंचलों में कम वर्षा हुई। उनमें प्राकृतिक पेयजल स्त्रोत या तो सूख गए हैं या सूखने की कगार पर हैं। अधिकतर स्थानों पर जलस्तर काफी नीचे चला गया है। 158 नगरीय निकायों में रोजाना पीने को पानी भी उपलब्ध नहीं है।ग्रामीण क्षेत्रों में भी हजारों हैडपंपों ने जवाब दे दिया है और कुओं, तालाबों व बावडियों में भी कई सूख गए हैं। इन्हीं हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने उक्त तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित करने का प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन उन्हें सूखाग्र्रस्त घोषित किया जाता, इससे पहले आचार संहिता प्रभावी हो गई। सरकार ने बाद में 5 मार्च को इसके लिए चुनाव आयोग से अनुमति मांगी। निर्वाचन आयोग ने आचार संहिता प्रभावी रहने तक (28 मई) अनुमति देने में असमर्थता व्यक्त कर दी है।इस कारण इन तहसीलों के बाशिंदों को राहत मिलने की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिर गया है। आयोग की अनुमति नहीं मिलने के कारण सूखाग्र्रस्त घोषित होने में दो माह से ज्यादा का विलंब होगा। इस स्थिति में इन तहसीलों के बाशिंदों को हर तरह की सहायता व राहत भी इतने ही विलंब से मिल सकेगी।ये तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित होनी हैं देवास, टोंकखुर्द, कन्नोद, सतवास, खातेगांव, बागली, हाटपिपल्या, रतलाम, सेलाना, बाजना, जावरा, पिपलोदा, आलोट, शाजापुर, गुलाना, मोमन बडोदिया, शुजालपुर, कालापीपल, मल्हारगढ, महिदपुर, तराना, इंदौर, महू, सांवेर, देपालपुर, हातोद, धार, सरदारपुर, धरमपुरी, गंधवानी, पेटलावद, थांदला, अलीराजपुर, भाभरा, खरगौन, भगवानपुरा, सेगांव, भीकनगांव, झिरन्या, महेश्वर, बडवाह, कसरावद, गोगावा, ठीकरी, राजपुर, सेंधवा, निवाली, अंजड, पंधाना, बुरहानपुर, हुजूर, बैरसिया, सीहोर, इछावर, आष्टा, बुधनी, नसरूल्लागंज, रेहटी, श्यामपुर, गोहरगंज, बेगमगंज, बरेली, उदयपुरा, बाडी, राजगढ, खिलचीपुर, जीरापुर, सारंगपुर, पचौर, होशंगाबाद, बाबई, इटारसी, सोहागपुर, बनखेडी, सिवनी मालवा, शाहपुर, मुलताई, आमला, भैंसदेही, आठनेर, हरदा, टिमरनी, रेहटगांव, देवरी, केसली, शाहनगर, अजयगढ, रैपुरा, पन्ना, लौंडी, गौरीहार, चंदला, राजनगर, कुण्डम, मझौली, बिछिया, निवास, रीठी, नरसिंहपुर, करेली, गाडरवाडा, तामिया, परासिया, जुन्नारदेव, सौंसर, पाण्ढुर्ना, बिछुवा, चौरई, उमरेठ, सिवनी, कुरई, केवलारी, बारासिवनी, लालबर्रा, खैरलांजी, लांजी, कटंगी, ग्वालियर, भितरवार, चाचौडा, दतिया, हुजूर, रायपुर, कर्चुलियान, गुढ, गोपदबनास, सिंहावल, कुसमी, मझौली, रामपुर नैकिन, चुरहट, देवसर, चितरंगी, सिंगरौली, रघुराजनगर, रामपुर बघेलान, नागौद, मैहर, उचहेरा, मझगंवा, कोटर, बिरसिंहपुर, अमरपाटन, रामनगर, जैतपुर, सोहागपुर, पुष्पराजगढ, कोतमा, जैतहरी, अनूपपुर, पाली, डिण्डोरी और शाहपुरा।यह होगा असर - केन्द्र से मदद में विलंब होगा।- सूखापीडितों की मदद के राहत कार्य देर से शुरू हो पाएंगे।- बाढेगी भुखमरी और कुपोषण।- किसान, मजदूर और अन्य लोग करेंगे पलायन।- पलायन से प्रभावित होगा मतदान।- सरकार के प्रति बढेगा जनाक्रोश।- गडबडाएगी कानून व्यवस्था।
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