प्रशासनिक स्तर की गति तेज परन्तु राजनैतिक दलो की गति धीमी
श्योपुर(उमेश सक्सेना) 8 अपे्रल 2009 मुरैना-श्योपुर लोकसभा सीट के लिए निर्वाचन 30 अपे्रल को होना है जिसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं वही किसी भी राजनैतिक दलो के प्रचार प्रसार में गति में किसी भी प्रकार की तेजी देखने को नही मिल रही है । मुरैना-श्योपुर संसदीय सीट के सामान्य होने के बाद त्रिकोणीय संघ्ार्ष होता नजर आ रहा है । वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के प्रत्याशी होने के कारण यह सीट काफी प्रमुख हो गई्र है । इसके बावजूद भी श्योपुर व विजयपुर में प्रचार प्रसार सुस्त बना हुआ है । अभी तक यहां किसी भी पार्टी द्वारा बैनर पोस्टरों का इस्तेमाल नहीं किया गया है और न ही कोई प्रचार वाहन इन क्षेत्रों में देखने को मिल रहे है । मुरैना-श्योपुर क्षेत्र के लिए 2 अपे्रल को अधिसूचना जारी हो जाने के बाद भी प्रत्याशियों की चुनावी रणनीति के लिए श्योपुर विजयपुर विधानसभा में प्रचार प्रसार को गति नही मिल पाई है । इधर भाजपा और कांगे्रस प्रत्याशियों द्वारा नामांकन दाखिल हो जाने के बाद भी अभी तक पार्टियों द्वारा श्योपुर विजयपुर में प्रचार प्रसार के लिये कोई रणनीति तैयार नहीं की गई है । इसका पता पार्टी सूत्रों सं प्रचार प्रसार की गतिविधियों पर की गई चर्चा से लगा । मुरैना-श्योपुर संसदीय क्षेत्र के श्योपुर विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में 3 लाख 27 हजार 791 मतदाता किसी भी प्रत्याशी को हराने जिताने का माद्दा रखते हैं । लेकिन इसे क्षेत्र के मतदाताओं की हमेशा से होती आ रही उपेक्षा के चलते कोई रूचि नही दिखा रहे हैं । इस सीट के 35 वर्षों बाद सामान्य होने से एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के प्रत्याशी होने से यह माना जा रहा था कि सभी दल भारी प्रचार प्रसार के साथ चुनाव लडेगें । क्षेत्र के राजनीतिज्ञों के अनुसार सभी दलों की सुस्ती का कारण सभी राजनैतिक दलों का अंर्तकलह एवं चुनावी खर्च को लेकर लागू की गई निर्वाचन आयोग की सख्ती भी हो सकता है ।तीनों प्रमुख दलो भारतीय जनता पार्टी , कांगे्रस , एवं बहुजन समाजवादी पार्टी , के दिग्गज प्रत्याशी बनाये जाने के चलते प्रारम्भ में यहो के मतदाता काफी उत्साहित थे, मतदाताओं को उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव के दौरान नेताओं द्वारा प्रसार प्रचार होने से अधिक से अधिक लोगों से व्यक्तिगत तौर से मुलाकात करेंगे, परन्तु चुनाव प्रचार में सुस्ती से मतदाताओं की उम्मीदों पर पानी फिरसा गया लगता है ।
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